(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला)                                        ऋषिकेश/समाचार भास्कर - निर्मल आश्रम के महंत राम सिंह महाराज की कृपा से निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी के आडिटोरियम में भव्य संगीत समारोह का आयोजन किया गया जिसमे देश-विदेश में मशहूर अजराड़ा घराने के तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने सपरिवार शिरकत की और अपने तबले की थाप देकर अपने नाम को सार्थक किया और सबके दिलों में अपनी ख्याति का प्रमाण दिया। 

सर्वप्रथम विद्यालय प्रधानाचार्या एवं हेडमिस्ट्रेस के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधि 'कप्तान' करन शाही और मानसी तिवाड़ी द्वारा मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पखावज वादक डॉक्टर संतोष नामदेव संगीत विभागाध्यक्ष, शांतिकुंज हरिद्वार और प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अकरम खान का स्वागत-सम्मान गुलदस्ता भेंट करके किया गया ।


तत्पश्चात निर्मल आश्रम संत जोध सिंह महाराज के सानिध्य में मंचासीन उपस्थित मुख्य अतिथि एवं सम्मानित गणमान्यों के साथ दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इसके बाद विद्यालय के कोयर ग्रुप ने मूल मंत्र गायत्री मंत्र के साथ दैनिक प्रार्थना हे गोविन्द हे गोपाल गाकर आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया ।

 प्रधानाचार्या डॉ सुनीता शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में संगीत का महत्व बताते हुए मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए, सभी मंचासीन अतिथिगणों का परिचय दर्शकों से करवाया और उसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने शबद 'मेर करो तृण ते मोहे जाहे' के माध्यम से 'गुरुवर' से अपनी कृपा बनाए रखने और हमारी गलतियों को क्षमा करने की प्रार्थना करते हुए अपनी प्रस्तुति दी। भक्ति काल की भक्त शिरोमणि भगवान कृष्ण की परम भक्त मीराबाई का प्रसिद्ध भजन 'पिया तोसे लागा जो ये मन' गाकर उपस्थित सभी दर्शकों को भक्ति रस से सरोबार कर दिया । 


अब समय आ चुका था मसूर 'तबला' वादन उस्ताद अकरम खान को देखने और सुनने का जिसकी प्रतिक्षा में सभी जन उत्साहित थे के लिए, विश्व विख्यात तबला वादक उस्ताद 'अकरम' खान ने जैसे ही तबले पर थाप दी पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा‌। तबले पर उनका साथ दिया उनके ही सुपुत्र 'ज़रगम' खान ने जो उनके परिवार की आठवीं पीढ़ी हैं और संगीत की इस विख्यात विरासत को आगे ले जाकर आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाने का इरादा रखते हैं, साथ ही हारमोनियम द्वारा उनके साथ संगीतमय स्वर दिया 'भातखंडे' संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ से हारमोनियम के प्रसिद्ध प्रशिक्षक श्री दिनकर द्विवेदी जी ने। तबले के साथ हारमोनियम के सुरों का अद्भुत संगम, तबला वादन की दिलकश शैली और पिता पुत्र की जोरदार जुगलबंदी ने सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। एक बार के लिए ऐसा लग रहा था मानो संगीत के सारे स्वर एनजीए ऑडिटोरियम में आकर सुरताल का संगम बिखेर रहे हों। 


इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. संतोष तथा अकरम खान ने खेल संबंधी विभिन्न प्रतियोगिताओं जिसमें की राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग, जिलास्तरीय योगा, अन्तर विद्यालय शतरंज और रग्बी विजेता खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया और अपने आशीर्वचन में अकरम जी ने कहा कि संगीत वास्तव में संतजनो से जुड़ा है। संत जोध सिंह महाराज के समक्ष अपनी प्रस्तुति को अपना परम सौभाग्य बताया। इससे एक दिन पूर्व दिनाँक 16 अक्टूबर को हुई 'तबला' कार्यशाला में भी उन्होंने एनजीए के छात्र-छात्राओं को तबला सहित विभिन्न वाद्ययंत्रों की बारीकियां बताई और उनके घरानों की जानकारी देकर उनकी जिज्ञासा का समाधान किया। 

गुरु की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि शीश कटा कर भी यदि अच्छे गुरु मिल जाएं तो भी बहुत कम है। गुरुजनों का सदैव आदर- सम्मान करना चाहिए उनका आशीर्वाद हमें सफलता के शिखर तक पहुंचाता है।

 मुख्य अतिथि ने महाराज जी के आशीर्वाद को अपनी अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि एनजीए में शिक्षा प्राप्त कर रहे सभी बच्चे परम सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें संत जनों के आशीर्वाद के साथ ऐसे शिक्षण संस्थान में शिक्षा लेने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है जिसका उद्देश्य ही ज्ञान दान है, जो संसार के सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ दान माना जाता है, जिसका ऋण जन्म- जन्मांतर तक नहीं चुकाया जा सकता। 
कार्यक्रम के बाद परम श्रद्धेय महाराज जी ने मुख्य अतिथि सहित अकरम खान को विद्यालय का स्मृति चिन्ह और अपने स्नेह और आशीर्वाद के रूप में सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। और उनकी धर्म पत्नी श्रीमती तरन्नुम खान और पुत्र को भी अपना अमूल्य आशीर्वाद प्रदान किया । 
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की हेडमिस्ट्रेस श्रीमती अमृतपाल डंग ने अकरम खान, मुख्य अतिथि तथा सभी आगंतुक सभी अतिथि गणों को अपना अमूल्य समय प्रदान कर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपना आभार जताया। कार्यक्रम का कुशल संचालन विद्यालय संगीत शिक्षिका श्रीमती दीपमाला कोठियाल ने किया।

इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों से आए संगीतकार बांसुरी वादक ईश्वरी प्रसाद यादव, तबला वादक सोमनाथ  मलय बनर्जी निर्मल नेत्र संस्थान से जनरल मैनेजर डॉक्टर अजय शर्मा डीएसबी से प्रधानाचार्य शिव सहगल एनडीएस प्रधानाचार्या श्रीमती ललिता कृष्ण स्वामी गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के मैनेजर सरदार दर्शन सिंह, जीएनए के संगीत प्रशिक्षक डॉ. गुरजिंदर सिंह, खेल प्रशिक्षक दिनेश पैन्यूली, पूनम चौहान, राजबाला नौटियाल, सोहन सिंह कैंतूरा, विनोद विज्लवाण आदि समस्त स्टाफ उपस्थित थे।
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