(रिपोर्ट@संवाददाता)                                 ऋषिकेश/समाचार भास्कर - नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवपुरी रेंज अंतर्गत वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण को वन विभाग की टीम ने ध्वस्त कर दिया है। निर्माणकर्ता को वन विभाग ने चेतावनी दी है यदि दोबारा से निर्माण करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 


ज्ञात हो कि नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवपुरी रेंज अंतर्गत ब्रह्मपुरी में लीज संख्या 52 में स्वामी विवेकानंद दास को धार्मिक आयोजन के लिए 0.2089 हेक्टेयर वन भूमि लीज पर निशुल्क दी गई थी। वर्तमान में लीज धारक की मृत्यु हो गई है। जिसके बाद अवैध रूप से एक व्यक्ति ने लीज की भूमि पर होटल खड़ा कर दिया है। लीज में मिली जमीन से अतिरिक्त वन विभाग की भूमि को कब्जा कर निर्माण भी कर रहा है। जो सीधे-सीधे लीज नीति का उल्लंघन भी है। इस मामले में मुनी की रेती निवासी ईश्वर शुक्ला ने 30 जून 2022 वन विभाग के कई अधिकारियों को शिकायत की। शिकायत का संज्ञान लेने के बाद वन विभाग हरकत में आया है। रेंजर विवेक जोशी ने बताया कि शिकायत का संज्ञान लेने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाई गई। कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण को ध्वस्त कर दिया है। निर्माण करने वाले व्यक्ति को चेतावनी दी गई है यदि फिर से वन विभाग की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की गई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी उसकी होगी। आपको बता दें कि वन विभाग की भूमि पर इस प्रकार से अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण करने के कई और मामले भी नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवपुरी रेंज में चल रहे हैं। जिन पर अभी कार्रवाई होनी बाकी है। उप प्रभागीय वन अधिकारी किशोर कुमार नौटियाल ने बताया कि वन विभाग की भूमि पर कहां-कहां कब्जा हुआ है इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


लीज संख्या 52 विवेकानंद दास अन्य, ट्रस्ट के नाम नहीं होगा ट्रांसफर ।

लीज संख्या 52 स्वामी विवेकानंद दास से जानकी कुटिया धर्मार्थ ट्रस्ट के नाम परिवर्तन करने के संबंध में शासन को एक वर्ष पूर्व एक पत्र प्रेषित किया गया था जिस का निरीक्षण करने के बाद जांच अधिकारी ने कहा की लीज धारक स्वामी विवेकानंद दास की मृत्यु 28/06 /2011 को हो गई थी जीवन काल में ही एक न्यास ट्रस्ट जानकी कुटीया ट्रस्ट के नाम सृजन किया गया एवं स्वामी प्रेम चैतन्य को ट्रस्ट का आजीवन अध्यक्ष मात्र नियुक्त किया गया । वही वन क्षेत्राधिकारी के रिपोर्ट में बताया गया कि उक्त स्थल में ओशो नामक आश्रम का संचालन किया जा रहा है जहां अनेक पर्यटक रात्रि विश्राम एवं ध्यान हेतु आते हैं । रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि न्यास में सम्मिलित तीन व्यक्ति एक ही परिवार (पिता, पुत्र एवं वधू) के होने का अंदेशा है जिससे वर्तमान में लीज का नाम परिवर्तन होना न्यास के नाम ट्रांसफर होना प्रतीत हो रहा है । रिपोर्ट पर जांच अधिकारी ने लिखा कि लीज पर दिए जाने के बाद प्रश्न गत वन भूमि का उपयोग प्रस्तावक द्वारा केवल व्यक्तिगत प्रयोजन हेतु ही किया जाएगा तथा उक्त भूमि अथवा उसके किसी भाग को अन्य विभाग संस्था अथवा व्यक्तियों को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा ।

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