(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला)                                  ऋषिकेश/समाचार भास्कर - यमकेश्वर के किरमोला गांव में अनुसूचित जनजाति के युवक की जमीन एक प्रॉपर्टी डीलर ने ओने पौने दाम पर खरीद कर बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी है। जिसका नक्शा तक पास नहीं है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पूछे जाने पर अधिकारी अब मामले में जांच कर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। 

दरअसल लक्ष्मण झूला के किरमोला गांव में एक प्रॉपर्टी डीलर ने अवैध तरीके से बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी है। जिसका नक्शा नहीं पास कराया गया है। न हीं संबंधित विभाग से एनओसी ली गई है। जिस जगह पर इमारत खड़ी की गई है। वह बहुत संकरी जगह है। जहां आपातकालीन परिस्थितियों में फायर की गाड़ी तक पहुंचने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना घटती है तो बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। दिलचस्प बात यह है कि यह बिल्डिंग महीने एक दो महीने में नहीं बल्कि दो साल में बनकर खड़ी हुई है। जिम्मेदार इस बिल्डिंग को बनते हुए देखते रहे। मामले में 16 अगस्त 2021 को एक शिकायत भी यमकेश्वर के एसडीएम को लिखित रूप में दी गई। बावजूद इसके आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह रहा कि इमारत पूरी बन के खड़ी हो चुकी है। जिसे एक होटल का रूप दिया गया है। उद्घाटन के बाद पर्यटकों की आवाजाही भी होटल में शुरू हो गई है। सवाल यह है कि कि आखिरकार अनुसूचित जनजाति के युवक की जमीन किस प्रकार एक सामान्य जाति के प्रॉपर्टी डीलर ने खरीद ली। दूसरा सवाल किस प्रकार मानकों के विपरीत लोगों की जान जोखिम में डालने के लिए बहुमंजिला इमारत खड़ी हो गई। शिकायत के बावजूद संज्ञान नहीं लिया जाना अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। ज्ञात हो कि इस संबंध में नगर पंचायत के सभासद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी की थी। जिसमें अनुसूचित जनजाति के परिवार को जमीन के बदले दो करोड़ रुपए देने की मांग रखी गई थी। वही एक सभासद ने भी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सस्ते मूल्यों में जमीन खरीद कर जो कि सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति के लोगों को दी गई है। क्या यह जमीन किसी सामान्य जाति के लोगों के नाम हो सकती है। क्या यह नियम है। उन्हें होटल बनाकर बेचा जा रहा है और जो मालिक है वह दर-दर भटक रहे हैं। मामले में जब एसडीएम यमकेश्वर प्रमोद कुमार से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी कि आखिरकार किस प्रकार अनुसूचित जनजाति के युवक की जमीन किसी सामान्य जाति के युवक ने कैसे खरीदी है। यदि इसमें रजिस्ट्री हुई है और जमीन बेची गई है तो स्थिति स्पष्ट होने के बाद जमीन को सरकार के पक्ष में नियत करने के लिए प्रक्रिया की जाएगी।

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