(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला)                              ऋषिकेश/समाचार भास्कर - ऋषि मुनियों की तपस्थली कहे जाने वाले ब्रह्मपुरी में मिलीभगत से एक आश्रम लगातार वन भूमि पर कब्जा कर रहा है। गंगा से महज 20 मीटर की दूरी पर पुस्ता लगाकर आश्रम संचालक कब्जा कर रहा है। सात महीने पहले भी आश्रम में पुस्ता लगाकर वन भूमि पर कब्जा किया गया था। वन विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं करने से आश्रम स्वामी के हौसले बुलंद है।

विदित हो कि नरेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र में लगातार वन भूमि पर कब्जा करने के मामले सामने आ रहे है। ब्रह्मपुरी के नीरगढ़ में एक आश्रम संचालक के हौसले इतने बुलंद हैं कि कानून को ठेंगे पर रख कर वह लगातार वन भूमि पर कब्जा कर रहा है। आश्रम में पिछले वर्ष सितंबर में भी वन भूमि पर पुस्ता लगाकर कब्जा किया था। परंतु वन विभाग एक मंत्री के फोन आने पर कार्रवाई करे बगैर बैरंग लौट गया। अब फिर गंगा से महज 20 मीटर की दूरी पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। वन विभाग की चौकी से महज 300 मीटर की दूरी पर कब्जा होने से विभाग पर सवाल खड़े होने लाजमी है। 

वन विभाग द्वारा आश्रम के दामोदरदास को अगस्त 1965 से 1969 तक लीज दिया गया था। फिर लीज को रिनुअल करा कर वर्ष 1999 तक किया गया। वर्तमान में इस भूमि पर विभाग द्वारा कोई लीज नहीं दी गई है। इस बीट में लगातार वन भूमि पर कब्जा होना पेड़ कटना आम बात हो गयी है। क्षेत्र में रह रहे कर्मचारी भी ट्रांसफर नीति का उल्लंघन कर रहे हैं। फिर भी विभाग इनको यहां से हटाने की जहमत नहीं उठा रहा है। जनवरी महीने में भी आश्रम के द्वारा चार हरे पेड़ काट दिए गए शिकायत के बाद विभाग ने संबंधित के खिलाफ मामला तो दर्ज किया परंतु अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इस संबंध में जब डीएफओ राजीव धीमान से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच की जा रही है। जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो पुलिस में भी मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।

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