(रिपोर्ट@ईश्वर शुक्ला)

ऋषिकेश/समाचार भास्कर - समय से इलाज न हो तो प्रीक्लेम्पसिया बीमारी से नवजात की जान भी जा सकती है। श्री राम नर्सिंग होम की महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गोयल ने 22 मई वर्ल्ड प्रीक्लैम्प्सिया डे के अवसर पर प्रेग्नेंसी से जुड़ी इस समस्या के खतरों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. प्रियंका गोयल ने बताया कि हर साल गर्भावस्था में प्रीक्लैम्प्सिया की बीमारी से अनेक माताओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाती है। एक्लेम्प्सिया प्रीक्लैम्प्सिया का एक प्रकार है, जिसमें दौरे या फिट आते है। यह दिमाग को क्षति और अन्य जटिलताओं के लिए अनेक माताओं की मौत के लिए जिम्मेदार है। यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो माता के साथ-साथ बच्चे के लिए जटिलताएं बढ़ सकती हैं। जैसे- प्लेसेंट्रल एबरप्शन, पल्मोनरी एडेमा, अक्यूट रीनल फेल्यिर आदि। आमतौर पर गर्भधारण के 20 सप्ताह बाद होता है। प्रीक्लैम्प्सिया के सबसे आम लक्षणों में गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और यूरीन में प्रोटीन आने के संकेत शामिल हैं। किसी भी महिला को गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लैम्प्सिया हो सकता है। जिन गर्भवती महिलाओं में इस स्थिति के विकास की संभावना अधिक होती है, उनमें पहली बार मां बनने वाली महिलाएं, गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप का पूर्व अनुभव रखने वाली महिलाएं, ऐसी महिलाएं जिनके परिवार में प्रीक्लैम्प्सिया का इतिहास है, गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे होने पर, 20 वर्ष से कम उम्र की गर्भवती महिलाएं या 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, उच्च रक्तचाप या गुर्दे की बीमारियों और बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स 30 से अधिक होने पर अधिक वजन वाली महिलाएं शामिल हैं। प्रीक्लैम्प्सिया जल्दी डायग्नोज होने पर इससे होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को अपना रक्तचाप नियमित रूप से जांचना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई जटिलता उत्पन्न न हो। 


जागरूकता से ही बचती है जान: डब्ल्यूएचओ ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, एक महिला को 16 सप्ताह, 24-28 सप्ताह, 32 सप्ताह और 36 सप्ताह में कम से कम चार एंटीनैटल विजिट्स के लिए जाना चाहिए। संतुलित आहार खाने और नियमित रूप से व्यायाम करने से मां और बच्चे को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिलती है। प्रीक्लेम्पसिया के संबंध में बढ़ती जागरुकता मातृ स्वास्थ्य के लिए सही कदम है। प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर इसकी जल्दी पहचान करना महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह स्थिति बिना किसी वॉर्निंग सिग्नल के तेजी से हो सकती है।

Share To:

Post A Comment: