(रिपोर्ट@संवाददाता)

ऋषिकेश/समाचार भास्कर -  नरेंद्रनगर वन प्रभाग के अंतर्गत ब्रह्मपुरी क्षेत्र में कुछ लोगों के द्वारा अरबों रुपए की आरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। जिस पर वन विभाग की कार्रवाई नहीं हो रही है। विभाग की लापरवाही से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। मामले में स्थानीय निवासी ईश्वर शुक्ला ने मुख्य सचिव, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड, वन संरक्षक भागीरथी वृत मुनि की रेती को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। 

                                                               

शिकायतकर्ता ईश्वर शुक्ला के अनुसार नरेंद्रनगर वन प्रभाग मुनी की रेती शिवपुरी रेंज के अंतर्गत ब्रह्मपुरी पुल के समीप लीज संख्या 51 गोपाल दास स्वामी के नाम से वन विभाग ने सन 1950 में 0.139 हेक्टेयर भूमि कुटिया के लिए लीज पर दिया था। जो 1969 में समाप्त हो गया। जिसको सन 1995 तक रिनुअल किया गया। 1995 के बाद से वर्तमान समय तक आरक्षित वन भूमि पर लीज दुबारा रिनुअल नहीं हुई। कुटिया बनाने के लिए ली गई वन भूमि पर अब आलीशान मकान बन कर खड़ा हो गया है। जो पूर्ण तरीके से अवैध है। वन विभाग से जानकारी लेने पर पता चला कि वर्तमान समय में भगवान सिंह, हरि सिंह, उदय सिंह, कुशाल सिंह, तथा सोहन सिंह अवैध रूप से वन आरक्षित भूमि पर काबिज है। जिनको 61 का नोटिस देकर बेदखल करने की कार्रवाई विभाग के द्वारा करने की बात कही जा रही है।

                                                                      

उप प्रभागीय वन अधिकारी डी.पी. बलोनी ने बताया कि जिस व्यक्ति के नाम से विभाग लीज जारी करता है। वही व्यक्ति लीज की भूमि पर रह सकता है। यही नही जिस प्रयोजन हेतु भूमि दी जाती है, उसी प्रयोजन में ही उस भूमि को प्रयोग कर सकते हैं। दूसरा कोई व्यक्ति उस भूमि पर काबिज नहीं रह सकता। लीज समाप्त होने पर भूमि विभाग अपने कब्जे में ले लेती है। यदि लीज धारक किसी भी शर्त के आधार पर वसीयतनामा लिख कर के दे देता है तो वह गैर कानूनी है। किसी के लिख कर दे देने से दूसरा व्यक्ति उस भूमि पर नहीं रह सकता। परंतु इस आरक्षित वन भूमि पर स्वामी गोपाल दास के स्वर्गवास होने पर बेताल सिंह पुत्र स्वारसिंह ग्राम नीर कुछ समय तक इस भूमि पर कब्जा करके रहे। जब बेताल सिंह के स्वर्गवासी होने पर इनके पुत्र वन आरक्षित भूमि पर अपनी पुश्तैनी हक जताते हुए भगवान सिंह रावत अपने भाइयों के साथ इस अवैध भूमि पर कब्जा करके रह रहा है। सूत्रों ने बताया कि ढाई रुपए के स्टांप पेपर पर बेताल सिंह द्वारा एक अवैध वसीयतनामा बनाई गई है। जिसमें वकील द्वारा नोटरी तक नहीं हुई है। बस कुछ लोगों के गवाही हुई है। जो गवाह वर्तमान समय मौजूद भी नहीं है। उसी वसीयत के आधार पर उनके पुत्रों द्वारा वन आरक्षित भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर आलीशान मकान और खेती बाड़ी की जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुटिया के लिए दी गई लीज पर स्वामी के मृत्यु के उपरांत भगवान सिंह द्वारा आसपास की संपूर्ण वन भूमि को घेर लिया गया। वहां पर आलीशान मकान बना दिया गया है। उस भूमि के आसपास भगवान सिंह द्वारा अपने भाइयों को भी बसा दिया गया है। परंतु विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

                                                                    

सूत्रों के हवाले से आई जानकारी सफेद पोस नेताओ की सह पर उक्त लीज भूमि पर भगवान सिंह द्वारा पूर्व में बीच कैंप संचालित किया जाता था। भगवान सिंह द्वारा द्वारा 'सरोवर गंगा' तथा उदय सिंह द्वारा आउटबैंड नाम से अवैध तरीके वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभगत से बीच कैंपिंग संचालित की जाती थी। मामला संज्ञान में होने के बावजूद भी विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह सवाल स्थानीय लोगों के दिमाग में भी घूम रहा है। इस सवाल का जवाब देने वाला भी कोई नहीं है।

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