ऋषिकेश/समाचार भास्कर - मुनिकीरेती क्षेत्र अंतर्गत नीर झरने का आनंद लेने के लिए वन विभाग ने एक साल से किसी भी प्रकार के शुल्क लेने के लिए कोई रसीद जारी नहीं की है। मगर नीर झरना स्वयं सहायता समूह पर्यटकों से लाखों रुपए की अवैध वसूली करने में लगा हैं। मामले में वन विभाग भी संस्था पर कार्रवाई करने के बजाय केवल पत्र देकर पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है। 


ज्ञात हो कि व्यापारी नेता पंकज गुप्ता ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें पंकज गुप्ता ने नीर झरना स्वयं सहायता समूह के द्वारा अवैध वसूली करने की बात सीएम के संज्ञान में लाई थी। मामले में मुनी की रेती क्षेत्र की रेंजर ने मुख्य संरक्षक को भेजे पत्र में यह बात स्वीकार की है कि वन विभाग वर्ष 2019 तक पर्यटकों से समूह के द्वारा शुल्क वसूलने के लिए बुक जारी करता था। मगर 2019 के बाद से किसी भी प्रकार की रसीद बुक जारी नहीं की गई है। वर्तमान में पर्यटकों से लिए लिए जाने वाला शुल्क अवैध है। इस संबंध में रेंजर ने संस्था को भी पत्र जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि जब विभाग को जानकारी है कि अवैध वसूली की जा रही है तो उस पर कार्रवाई करने के बजाय पत्राचार क्यों किया जा रहा है। मामले में व्यापारी नेता पंकज गुप्ता भी असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। उन्होंने दोबारा से पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा दी है।

इस संबंध में जब रेंजर से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने किसी भी प्रकार का पक्ष से देने से मना कर दिया






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