ऋषिकेश/समाचार भास्कर - निर्मल आश्रम में गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया मौके पर तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ का भी समापन हो गया। इस दौरान शब्द कीर्तन के बाद साधु संतों को भोज कराया गया। 

सोमवार को गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के मौके पर पहली बार ऋषिकेश के गुरुद्वारों में चहल पहल कोरोना की वजह से कम दिखाई दी। रेलवे रोड पर हर साल होने वाले विशाल लंगर को भी वैश्विक महामारी के चलते आयोजित नहीं किया गया। हालांकि धार्मिक अनुष्ठान सभी गुरुद्वारों में किया गया। निर्मल आश्रम में कोरोना के नियमों का पालन करते हुए प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया। तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ का भी समापन हुआ। इस दौरान शब्द कीर्तन और भोग लगाने के बाद अरदास की गई। मौके पर साधु-संतों को भोज भी कराया गया। आश्रम के महंत राम सिंह महाराज और संत जोध सिंह महाराज ने कहा कि गुरु पर्व केवल पर्व ही नहीं बल्कि सच्चे मन से गुरु महाराज को याद करते हुए उनके बताए सदमार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने लोगों से गुरु ग्रंथ साहिब का अनुसरण कर सदमार्ग पर चलने की अपील की। मौके पर निर्मल आश्रम की तीनों इकाइयों के डॉक्टर शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे। 


...एक नजर में गुरुनानक देव की जीवनी। 

गुरु नानक देव ने समाज को एकजुटता के लिए कई संदेश दिए गुरु नानक देव का कहना था कि भगवान एक है और भगवान सभी जगह पर है। उनका कहना था कि हमेशा मेहनत करनी चाहिए और लोगों की सहायता करनी चाहिए। 

देशभर में आज गुरु नानक जयंती मनाई जा रही है। हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु माने जाते हैं। कहा जाता है कि बचपन से ही गुरु नानक देव का आध्यात्मिकता की तरफ काफी रुझान था और वह सत्संग और चिंतन में लगे रहते थे। 30 साल की उम्र तक गुरु नानक देव का ज्ञान परिपक्व हो चुका था और परम ज्ञान हासिल होने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य का प्रचार किया। गुरु नानक देव की जयंती को सिख धर्म के लोग बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा से प्रकाश पर्व या गुरु पर्व के तौर पर मनाते हैं। कहा जाता है कि ईश्वर की तलाश की खातिर गुरु नानक ने 8 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था। गुरु नानक देव का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ होने के कारण उन्होंने सांसारिक कामों से दूरी बना ली थी। वे लगातार ईश्वर और सत्संग की तरफ रुचि लेने लगे थे। ईश्वर के प्रति गुरु नानक का समर्पण काफी ज्यादा था। जिसके कारण लोग उन्हें दिव्य पुरुष मानने लगे। गुरु नानक जयंती यानी प्रकाश पर्व के मौके पर गुरुद्वारों में शब्द-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही अलग-अलग जगहों पर लंगर भी लगाए जाते हैं।

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