ऋषिकेश/समाचार भास्कर - मुनी की रेती के शिवपूरी रेंज के अंतर्गत नीर झरने के लिए जाने के दौरान लिए जाने वाले प्रवेश शुल्क के लिए जो रसीद पर्यटकों को दी जा रही है। उस पर विवाद खड़ा हो गया है। 

       दरअसल नीर झरने पर जाने के लिए प्रवेश शुल्क चुकाना पड़ता है। जिसके एवज में जो रसीद पर्यटकों को दी जा रही है। उस पर ना तो शासनादेश कि कोई जानकारी है ना ही प्रपत्र संख्या लिखी है। यही नहीं प्रवेश शुल्क की रसीद पर स्वयं सहायता समूह का नाम प्रकाशित है। यह मामला सामने आने के बाद व्यापारी नेता पंकज गुप्ता ने मामले में बड़ी अनियमितता होने की आशंका जताई है। उन्होंने मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इसकी शिकायत की है। इस संबंध में उन्होंने रसीद और अन्य दस्तावेज सीएम पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। ज्ञात हो कि नीर झरना वन विभाग के अंतर्गत आता है। ऐसे में वन विभाग की बड़ी लापरवाही का यह मामला भी हो सकता है। इस संबंध में जब वन विभाग के रेंजर स्पर्श काला से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में यह समिति बनी थी विभाग की ओर से कुछ अधिकार दिए गए थे और यह यथावत चलती आ रही थी परंतु 1 वर्ष पहले ही विभाग द्वारा शिवालिक वार्ड डायवर्सिटी पार्क की कमेटी के अंदर इसको डाइवर्ट करने का प्लान किया है जो अभी वह शासन की तरफ से इनप्रोसीजर में है ।

अब वन विभाग ने वह सारे अधिकार खत्म कर दिए। अब इस प्रकार का मामला सामने आ रहा है। जिसका संज्ञान लेकर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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