ऋषिकेश/समाचार भास्कर - 60 वर्षों से निर्मल आश्रम संस्थान गरीब असहाय व निर्धन लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है। वहीं इस कोरोना काल में 22 मार्च से कोई भूखा पेट ना सोए इसके लिए भी निर्मल आश्रम में पूरा प्रयास किया है।


           कोरोना के दौरान आश्रम के महंत राम सिंह महाराज व संत जोध सिंह महाराज का विशेष ध्यान रहा है। सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ हर व्यक्ति को मास्क लगाकर व सनराईज करके ही आश्रम के क्षेत्र में प्रवेश मिल रहा है।


बता दें कि इस कोरोना काल में जहां ऋषिकेश के आश्रम में जहां रोजाना हजारों लोगों का पेट भरा वही मुनी की रेती क्षेत्र में भी गरीब व असहाय लोगों के लिए भी लंगर की व्यवस्था की गई। इसी के साथ दूर-दराज व जंगलो में रहने वाले गुज्जर परिवारो को भी सूखे राशन की व्यवस्था की गयी। प्रसाशन के आग्रह पर भी एक हजार सुखा राशन का पैकेट दिया गया। आश्रम के महंत राम सिंह महाराज का कहना है कि भूखों को खाना खिलाना मानव की सच्ची सेवा करना है। यही सेवा ईश्वर की सेवा भी कहलाती है। जबकि लॉकडाउन धीरे-धीरे खत्म हो गया और लोगों को काफी छूट भी मिल गई, बावजूद इसके आश्रम के द्वारा चलाए जा रहे गरीब व असहाय लोगों के लिए क्षेत्र व लंगर में कोई कमी नहीं आई है। लोगों का भूखा पेट भरने के विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ-साथ अंग वस्त्र जूते चप्पल बर्तन और आसपास के तकरीबन सभी बच्चों को कपड़े, कापी किताब इत्यादि भी दिया जा रहा है। ताकि लोगों को इस लॉकडाउन में गरीब तबके के लोगो को किसी भी प्रकार से परेशानी का सामना ना करना पड़े।


खास बात यह भी है कि आश्रम के महंत राम सिंह महाराज खुद इस कोरोना काल में सुबह-शाम अपने हाथ से क्षेत्र की सेवा में जुटे रहते हैं। सेवादार बताते हैं कि आश्रम के दरबार से कोई खाली हाथ ना जाए इस पर सभी सेवादारों का विशेष ध्यान रहता है। बताते हैं कि पैसे के अभाव में जिसका इलाज नहीं हो पाता है उन लोगों का मुफ्त में इलाज भी करवाया जाता रहा है।

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