ऋषिकेश/ समाचार भास्कर - परमार्थ निकेतन में स्वर्णिम सूर्य का उदय शंख ध्वनि और वेद मंत्रों दिव्य ध्वनि के साथ हुआ। विश्व के 73 देशों से आये योग साधक माँ गंगा के जल में स्नान के साथ दिव्य विभूतियों और विख्यात पूज्य संतों के सत्संग में अपनी आत्मा का स्नान करा रहे है।
 मंगलवार को आध्यात्मिक सत्संग श्रृंखला में योगियों को पुर्तगाल निवासी आध्यात्मिक गुरू मूजी के दिव्य संदेशों का लाभ प्राप्त हुआ।
परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में जूना पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती। पूज्य संतों ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाले विश्व शान्ति हवन में चीन सहित विश्व के अनेक देशों में कोरोना वायरस से पीड़ित भाई-बहनों के स्वास्थ्य लाभ के लिये विशेष आहुतियाँ प्रदान की। 
परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने भारतीय परम्परानुसार शंख ध्वनि, वेदमंत्र एवं तिलक लगाकर उनका दिव्य स्वागत किया। उन्होने यहां पर योग, ध्यान, गंगा आरती और आध्यात्मिक सत्संग में सहभाग किया।
पुर्तगाल निवासी आध्यात्मिक गुरू मूजी ने संदेश देते हुये कहा कि ’’सत्य से युक्त जीवन ही आध्यात्मिक जीवन है। सत्य, सत्य होता है वह कभी भी बदलता नहीं है। उन्होने कहा कि हमारा शरीर, हमारा घर है, हम उसमे बहुत सारी चीजें डालते है परन्तु हमें इसके लिये जागरूक होना होगा कि हम क्या विचार डाले।  जो हम डाल रहे है वही हमारी पहचान है। उन्होने हार्ट इस्टैब्लिशमेंट के विषय में बताते हुये कहा कि आप अपने बीते हुये कल और भविष्य  में मत जाइये कुछ क्षणों के लिये वर्तमान में रहने की कोशिश करे। 
 उन्होने कहा कि ’योगा फाॅर विसडम’ यही मंत्र है।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि  ’’अध्यात्म के बिना जीवन वैसे ही है जैसे बिना पानी के नदी; बिना पैसे के बैंक। नदी तब तक ही आनन्द देती है जब तक उसमें जल हो उसी प्रकार अध्यात्म से युक्त जीवन ही आनन्ददायक होता है। जीवन में अगर अध्यात्म न हो तो जीवन में शान्ति नहीं आ सकती।
जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने 73 देशों से आये योगियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें।
उन्होंने कहा कि मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूँ कि मुझे अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग करने का अवसर प्राप्त हुआ। 
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा ’’योग, सार्वभौमिक है और भारत, योग का जन्मदाता है। योग, शरीर, आत्मा और परमात्मा के मिलन का माध्यम है। जिस प्रकार यह आत्मा से परमात्मा का मिलन कराता है उसी प्रकार योग दुनिया की विभिन्न संस्कृति का मिलन कराता है ।
विश्व विख्यात योग महापर्व की मेजबानी परमार्थ निकेतन द्वारा सन 1999 से निरन्तर की जा रही है। इस अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में विश्व के 25 से अधिक देशों के 90 से अधिक पूज्य संत एवं योगाचार्य सम्मिलित हुये हैं। अब तक 73 से अधिक देशों के 1415 से अधिक प्रतिभागी सहभाग कर चुके हैैं और लगातार दुनिया के विभिन्न देशों के योग जिज्ञासु इस महोत्सव में सहभाग हेतु पंजीयन करा रहे हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में योग की 150 से अधिक कक्षायें होती है। यह क्रम प्रातः 4:00 बजे से रात 9:30 बजे तक एक सप्ताह तक प्रतिदिन चलता है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन परमार्थ निकेतन, अतुल्य भारत, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है।
विश्व के अनेक देशों से आये योगियों के लिये परमार्थ गंगा आरती सबसे प्रसन्नता देने वाला क्षण होता है ।
प्राचीन भारतीय दर्शन, वेदान्त, मानव सशक्तिकरण, प्रेरक नृत्य, संगीत, तनाव नियंत्रण कार्यशाला, आहार विशेषज्ञ के साथ चर्चा जैसे अनेक सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।
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