ऋषिकेश/ समाचार भास्कर - चंद्रेश्वर नगर निवासी रामजी साहनी की कैंसर की वजह से अचानक मौत हो गई। जिसके बाद उनकी तीसरे नंबर की बेटी ने बेटे का फर्ज निभाते हुए श्मशान घाट पर मुखाग्नि दी।
     शुक्रवार को श्मशान घाट पर चंद्रेश्वर नगर निवासी राम जी साहनी के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। इस दौरान उनकी तीसरे नंबर की बेटी भी साथ में पहुंची। यह नजारा देख लोगों में चर्चा होने लगी। कुछ ही देर बाद पिता के क्रिया कर्म को लेकर बेटी ने सारे क्रियाकलाप करने शुरू किए तो यह बात जंगल में लगी आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। बेटी ने बताया कि उनके पिता ढाई साल से बीमार थे और वह लगातार उनके इलाज के लिए साथ में जाती थी। इस दौरान उनके पिता ने मरने से पहले इच्छा जताई थी कि मरने के बाद उनकी बेटी ही उनको मुखाग्नि दी। क्योंकि वह पांच बहने हैं और उनका कोई भाई नहीं है। पिता की इच्छा को पूरा करते हुए उसने धर्म रीति रिवाज को दरकिनार कर अपने पिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया और श्मशान घाट में भरी भीड़ के बीच अपने पिता को मुखाग्नि देकर बेटे होने का फर्ज निभाया। यह घटना एक मिसाल बनी है कि वर्तमान में समय में जहां सरकार बेटे और बेटी को समान दर्जा देने की लगातार कोशिशें कर रही है। वहीं अब बेटियां भी बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने में पीछे नहीं है। और वह हर करम बेटे की तरह कर सकती हैं।
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