ऋषिकेश/समाचार भास्कर - बदलते मौसम में बढ़ रही बुखार की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि घर में किसी को भी बुखार आता है तो तत्काल डॉक्टर से परामर्श कर दवाई लेनी चाहिए। हो सके तो एलोपैथिक की जगह होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाई लेनी चाहिए। क्योंकि बदलते मौसम में हर प्रकार के बुखार की होम्योपैथिक दवाई में बेहतर उपचार किया जा सकता है। इसी के साथ चीन में बढ़ रहे कोरोना वायरस का इलाज भी होम्योपैथिक पद्धति में है। 
      यह विचार होम्योपैथिक चिकित्सा डॉ. स्वामी नारायण ने श्यामपुर क्षेत्र में लगाए गए निशुल्क चिकित्सा शिविर के दौरान मरीजों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए उन्होंने कहा कि यह बीमारियां संक्रामक हैं क्योंकि ये बीमारियां जहाँ जिसको होती है वहाँ आस पास के लोगों मे भी इनके संक्रमण फैलते हुए देखे जा रहे हैं ।
लगभग चार वर्ष पहले डेंगू और चिकनगुनिया से पीड़ित लोग  आज भी उस दर्द और पीडा से प्रभावित है। डेंगू एवं चिकुनगुनिया बुखार की चिकित्सा होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में है। जैसे ही हड्डी एवं जोडों के दर्द के साथ बुखार हो तुरन्त किसी अच्छे होम्योपैथ से इसकी चिकित्सा करानी चाहिए।उस समय चिकुनगुनिया के सम्बंध में जानकारी न होने से कई चिकित्सक भी इससे प्रभावित हो गये थे। चिकुनगुनिया एवं डेंगू इन दोनों बुखार में जोडों एवं हड्डी में दर्द होता है , शरीर का ताप 103 से 105 तक पहुंच जाता है । डेंगू में प्लेट लेट काउन्ट का लेवल नीचे आ जाता है लेकिन चिकुनगुनिया में ऐसा नहीं होता , शरीर का ताप और दर्द दोनों मे लगभग समान होते हैं । डेंगू का दर्द बुखार के बाद ठीक हो जाता है लेकिन चिकुनगुनिया का दर्द बुखार चले जाने के बाद भी शरीर में बना रहता है, यह वर्षों तक रहता है। इस तरह के दर्दों की दवा भी होम्योपैथी में है। इस दर्द के लिये ऐलोपैथिक दर्द निवारक दवा कदापि नहीं लेनी चाहिए ये दवा गुर्दे, अग्नाश्य, लिवर, पक्वाशय, फेफडे एवं हृदय आदि सूक्ष्म अंगों को क्षति पहुंचाती हैं।कोरोना वाइरस भी ऐसा ही संक्रामक बीमारी है जो फेफड़ों एवं श्वास नली पर आक्रमण करती है तथा इसमे बुखार के साथ साथ शरीर में दर्द भी होता है ।लगभग 103 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उनकी बीमारी के अनुसार दवा दी गई।  
इस शिविर में विवेक रावत.संजय शर्मा, सुदर्शन पंत, सागर, विनोद रावत एवं धनपाल सिह रावत तथा अन्य स्वंय सेवक उपस्थित थे।
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