ऋषिकेश/ समाचार भास्कर - काले की ढाल स्थित शास्त्री नगर में 7 दिन से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज समापन हो गया। मौके पर ब्रह्मभोज के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित हुआ।
       श्रीमद् भागवत कथा के समापन मौके पर व्यासपीठ पर बैठे कथावाचक उत्तराखंड ज्योतिष रतन आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि प्रभास क्षेत्र में भगवान कृष्ण का गोकुल वासियों से मिलन हुआ। तब पहली बार उनकी दो माता देवकी और यशोदा का भी मिलन हुआ। इस दौरान दोनों माताओं ने श्री कृष्ण से पूछा कि तुम कितने बेटे हो। इस पर भगवान ने यशोदा का हाथ पकड़ लिया। इस संदर्भ का मतलब है कि जन्म देने वाली मां से बढ़कर जस्ट देने वाली मां होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से पाप कटते है। इसलिए सभी लोगों को अपने जीवन में कम से कम एक बार 7 दिन तक भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे कर्म करने चाहिए। जिसका फल इस जन्म ही नहीं बल्कि उसे अगले जन्म में भी मिले। क्योंकि इंसान के कर्म ही उसके साथ परलोक तक जाते हैं। समापन के मौके पर कथावाचक को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ हिमांशु अग्रवाल भास्कर आशीष ध्यानी पृथ्वीराज ध्यानी संध्या ध्यानी सूर्यप्रकाश कृष्णा कृपाराम पोखरियाल अशोक ध्यानी गौरव सुरेश अतुल दीक्षा आदि ने सम्मानित भी किया।
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