ऋषिकेश/समाचार भास्कर - जीते जी रक्तदान और मरने के बाद नेत्रदान करना इंसान का धर्म होना चाहिए। एक छोटी सी पहल से देश के सवा करोड़ नेत्रहीन लोग दुनिया का सुंदर नजारा देख सकते हैं। 

       यह बात मेयर अनीता ममगाईं ने एक कार्यक्रम में उपस्थित स्कूल के सैकड़ों बच्चों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि निर्मल आश्रम आई इंस्टिट्यूट शहर ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी कैंप लगाकर गरीबों को नेत्र से संबंधित बीमारियों का निशुल्क इलाज दे रहा है। जिसकी जितनी सराहना की जाए कम है। निर्मल आश्रम आई इंस्टिट्यूट के जनरल मैनेजर अजय शर्मा ने बताया कि देश में सवा करोड़ नेत्रहीन लोग हैं। जो अभी भी इस उम्मीद के साथ हैं कि उन्हें कभी यह दुनिया देखने का मौका मिलेगा। यह मौका उन्हें तभी मिल सकता है जब हम मरने के उपरांत अपने नेत्र उन नेत्रहीन लोगों के लिए दान कर जाएंगे। आपकी एक छोटी सी पहल नेत्रहीनों का सहारा बन सकती है। निर्मल आश्रम अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी विक्रमजीत सिंह ने कहा कि आई इंस्टिट्यूट की ओर से 4 सालों से लगातार जन जागरूकता रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिसका परिणाम यह है कि शहर और पड़ोसी राज्यों से अब तक सैकड़ों लोग नेत्रदान कर चुके हैं। मगर यह संख्या अभी बहुत कम है। जिसे बढ़ाने के लिए जन जागरूकता बेहद जरूरी है। बताया कि 7 सितंबर को नेत्रदान करने वाले लोगों के परिजनों को बड़े कार्यक्रम में मंच से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के बाद सैकड़ों बच्चों ने शहर में जन जागरूकता रैली निकाली। जिसका शुभारंभ मेयर के साथ शहर के गणमान्य लोगों ने हरी झंडी दिखाई रैली मुख्य मार्गो से होते हुए निर्मल अस्पताल में संपन्न हुई। इस दौरान संत जोत सिंह महाराज ने शहर की दर्जनों संस्थाओं का सहयोग देने पर आभार व्यक्त किया। मौके पर स्वामी अमृत प्रकाश, ब्रह्मचारी संदीप, विजयलक्ष्मी, शिवानी कौल, डॉक्टर आसिफ, डॉ वंदना, अतुल अंबेडकर, डॉक्टर प्रणय, डॉक्टर अंशिका कश्यप, प्रतिष श्रीवास्तव, सरदार करमजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।

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