ऋषिकेश/समाचार भास्कर - मुनिकीरेती स्थित मधुबन आश्रम की संपत्ति के मामले में स्वामी परमानंद दास ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। इस मामले में उन्होंने अपने आश्रम में पत्रकारों से वार्ता की है।

 शनिवार को आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए परमानंद स्वामी ने कहा कि जो लोग इस समय आश्रम की संपत्ति पर अपना हक जता रहे हैं। वह 1995 में ट्रस्ट से निष्कासित हो चुके हैं। स्वामी भक्ति योग महाराज के निधन के बाद में अवैध रूप से संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। राजनीतिक दबाव डलवा कर उन्होंने उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कराया है। स्वामी भक्ति योग की इच्छा से ही वह सर्वसम्मति से आश्रम की गद्दी पर संचालन के लिए बैठे हैं। आश्रम उन सभी नियमों का पालन कर रहा है। जिनका पालन स्वामी भक्ति योग महाराज के समय में किया जाता है। उन्होंने बताया कि उनके ऊपर मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना मुनी की रेती में एक तहरीर भी उनकी ओर से दी गई है। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरा पक्ष पुलिस पर किस तरीके से दबाव डलवाने में लगा हुआ है। कहा कि यदि सही रूप से संपत्ति पर निष्कासित ट्रस्टियो का हक है तो वह न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखें और यदि कोर्ट के द्वारा फैसला उनके हक में आता है तो वह स्वेच्छा से पीछे हट जाएंगे। बताया कि संपत्ति और उनके गद्दी पर बैठने से संबंधित सारे दस्तावेज उनके पास मौजूद है।

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