ऋषिकेश/समाचार भास्कर - ऋषिकेश क्षेत्र में डेंगू के मरीज बढ़ते देख स्वामीनारायण मिशन सोसायटी के द्वारा खदरी खडकमाफ श्यामपुर में डेंगू ज्वर चिकित्सा एवं जागरूकता शिविर के साथ साथ सामान्य रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया । जिसमें105 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उनकी बीमारी के अनुसार दवा दी गई। इस अवसर पर मिशन के अध्यक्ष स्वामी नारायण दास जी महाराज ने इस बीमारी के संबंध मे प्रकाश डालते हुए कहा ये दोनों बीमारी संक्रामक भी हैं क्योंकि यह बीमारी जहाँ जिसको होती है वहाँ आस पास के लोगों मे भी इसके संक्रमण फैलते हुए देखे जाते हैं । लगभग तीन वर्ष पहले डेंगू और चिकनगुनिया से पीड़ित लोग  आज भी उस दर्द और पीडा से प्रभावित है।
डेंगू एवं चिकुनगुनिया बुखार की चिकित्सा होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में है। जैसे ही हड्डी एवं जोडों के दर्द के साथ बुखार हो तुरन्त किसी अच्छे होम्योपैथ से इसकी चिकित्सा करानी चाहिए। गत वर्ष चिकुनगुनिया के सम्बंध में जानकारी न होने से कई चिकित्सक भी इससे प्रभावित हो गये थे। चिकुनगुनिया एवं डेंगू इन दोनों बुखार में जोडों एवं हड्डी में दर्द होता है , शरीर का ताप 103 से 105 तक पहुंच जाता है । डेंगू में प्लेट लेट काउन्ट का लेवल नीचे आ जाता है लेकिन चिकुनगुनिया में ऐसा नहीं होता , शरीर का ताप और दर्द दोनों मे लगभग समान होते हैं । डेंगू का दर्द बुखार के बाद ठीक हो जाता है लेकिन चिकुनगुनिया का दर्द बुखार चले जाने के बाद भी शरीर में बना रहता है, यह वर्षों तक रहता है। इस तरह के दर्दों की दवा भी होम्योपैथी में है। इस दर्द के लिये ऐलोपैथिक दर्द निवारक दवा कदापि नहीं लेनी चाहिए ये दवा गुर्दे, अग्नाश्य, लिवर, पक्वाशय, फेफडे एवं हृदय आदि सूक्ष्म अंगों को क्षति पहुंचाती हैं। आज समाज में जो कैंसर, गुर्दे एवं हृदयादि के बिगडने की खबर आती हैं इसका अधिकांश एवं मुख्य कारण दर्द निवारक एवं प्रतिजैविक दवाओं का अधिक मात्रा में सेवन है। हर सँभव इन दवाओं के सेवन से बचना चाहिए यदि सेवन करना पड जाए तो PROBIOTIC दवा या शुद्ध-गोदूध का दहीका सेवन  कुछ दिनों तक अवश्य करना चाहिए।इस शिविर में खदरी खडकमाफ के अतिरिक्त गढी श्यामपुर, भल्ला फार्म, गुमानीवाला, नम्बरदार फार्म, ढालवाला, डोईवाला, रायवाला, माजरीग्रान्ट, हरिपुर कलां, लाल तप्पड, खैरीखुर्दकला, आई डी पी एल, शिवाजी नगर , गीतानगर एवं हरिद्वार आदि के लोग लाभान्वित हुए।
        इस शिविर में विवेक रावत. तुषार शर्मा, विरेन्द्र शर्मा, विनोद रावत एवं धनपाल सिह रावत तथा अन्य स्वंय सेवक उपस्थित थे।

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