ऋषिकेश/समाचार भास्कर - मॉडर्न स्कूल ढालवाला के छात्रों ने परिसर में पौधारोपण कर हरेला पर्व को मनाया। इस दौरान छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।
        बुधवार को हरेला पर्व का शुभारंभ स्कूल के डायरेक्टर डॉ. ज्योति जुयाल ने सर्वप्रथम पौधारोपण करके किया। कहा कि पर्यावरण बचाना प्रत्येक व्यक्ति का धर्म होना चाहिए। उन्होंने हरेला पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि हरेला पर्व हिंदू त्योहार है। जो मूल रूप से उत्तराखंड में मनाया जाता है। बताता कि हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है। 1- चैत्र मास में - प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है। 2- श्रावण मास में -सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है। 3-आश्विन मास में - आश्विन मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है। सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इसमें मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के बीजों को बो दिया जाता है। नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। 4 से 6 इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है। घर के सदस्य इन्हें बहुत आदर के साथ अपने शीश पर रखते हैं। घर में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया व काटा जाता है। इसके मूल में यह मान्यता निहित है कि हरेला जितना बड़ा होगा उतनी ही फसल बढ़िया होगी।  साथ ही प्रभू से फसल अच्छी होने की कामना भी की जाती है। इस दौरान छात्रों ने करीब 2 दर्जन से अधिक पौधे रोककर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया छात्रों ने कहा कि वह अपने पड़ोसियों को भी पर्यावरण बचाने के उद्देश्य से जागरूक करेंगे। मौक़े पर मॉडल स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ वीके शर्मा अध्यापक अनिरुद्ध रयाल, भानु प्रिया शर्मा, शालिनी वर्मा, निधि बडोला, सुनीता ग्वारी, जगदंबा प्रसाद और विद्यालय के सभी बच्चे उपस्थित रहे।

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