ऋषिकेश/समाचार भास्कर - लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला लक्ष्मण झूला पुल आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है। इसका खुलासा लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की जांच के बाद हुआ है।

मुनी की रेती स्थित नगर पालिका में आयोजित बैठक के दौरान कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने जब लक्ष्मण झूला और राम झूला पुल के बारे में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही तो विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 22.01.19 को  डिज़ाइन टेक स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट द्वारा विस्तृत तकनीकी से अध्यन किया गया जिनमे पाया गया कि लक्ष्मणझूला सन 1930 का बना हुआ है । जो की पुल इस समय एक्सपायर हो चुका है । पी.के. चमोली का कहना था कि इस पुल पर यात्रा कराना खतरे से खाली नही है कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है ।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कृषि मंत्री सुबोध उनियाल को बताया कि जांच में लक्ष्मण झूला पुल आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है। किसी भी पल कभी भी पल बड़ा हादसा हो सकता है। यह जानकारी मिलते ही बैठक में उपस्थित अधिकारियों में सन्नाटा छा गया। विभाग ने सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट भेजकर पुल पर आवागमन बंद करने की सिफारिश की है। आपको बता दें कि लक्ष्मण झूला पुल ब्रिटिश शासन काल के वर्ष 1930 में बनाया गया था उस समय पुल की डिजाइन कम लोगों के आवागमन के हिसाब से बनाया गया था । जानकर बताते है कि ऐसे पुलों की  समय अवधि 90/100 वर्ष मानी जाती थी इनके जो समय तकरीबन पूरी हो गई है । और आज के समय मे रोजाना हजारों लोगों का आवागमन ठेली टूवीलर से होता है जिसकी वजह  से सेतु के टावर अपनी पुर्ण स्थिति में नही है ।

वही कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने लोक निर्माण विभाग के निर्देश देते हुए यह भी कहा कि या तो झूला मार्ग बंद कर दिया जाए या फिर रेलिंग लगाकर एक एक आदमी को आने जाने का आवागमन करें ताकि पुल पर ज्यादा बाहर ना पड़े तथा खतरे से बचा जाए ।

अब देखना यह है कि सरकार इस पुल को लेकर क्या अग्रिम कार्रवाई करती है। क्योंकि यदि इस पुल पर आवागमन बंद हुआ तो सैकड़ों स्थानीय लोग तो आवागमन के लिए परेशान होंगे ही प्रतिदिन आने वाले हजारों पर्यटको को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर राम झूला पुल पर भी पर्यटकों के आवागमन का दबाव बढ़ेगा। खास बात यह है कि 1 सप्ताह बाद श्रावण मास की कावड़ यात्रा शुरू होने वाली है। सीजन के दौरान करीब 30 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु राम लक्ष्मण झूला पुलों से होकर ही नीलकंठ महादेव मंदिर में दर्शनों को पहुंचते हैं। यदि इस पुल पर आवागमन बंद हुआ तो कावड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किस तरीके से गंगा पार भेजा जाएगा यह चिंता का विषय बना हुआ है।

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