ऋषिकेश/समाचार भास्कर - श्रावण मास की यात्रा के दौरान सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो इसके लिए डीएम और एसएसपी पौड़ी ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ डीएम कैंप कार्यालय लक्ष्मणझूला में बैठक की।

 सभी अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए। सोमवार को लक्ष्मण झूला स्थित डीएम कैंप कार्यालय में एसएसपी दलीप सिंह कुंवर डीएम धीरज सिंह गबर्याल ने यात्रा की तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों से फीडबैक लिया।
इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने रात के समय झूला पुलों पर स्थानीय वाहनों को संचालित करने के लिए अपनी बात रखी। एसएसपी ने बताया कि जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए पहले ही दिन से हरिद्वार आने और जाने वाले वाहनों के लिए वनवे की व्यवस्था लागू की जाएगी। हरिद्वार की ओर से आने वाले सभी वाहन चीला मार्ग से होते हुए  बैराज पहुंचेंगे। यहां से लक्ष्मण झूला होते हुए नीलकंठ और गढ़वाल जाने वाले वाहनों को गरुड़ चट्टी के पुल से गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा। जबकि नीलकंठ से वापस आने वाले वाहनों को गरुड़ चट्टी पुल और मुनि की रेती होते हुए हरिद्वार की ओर भेजा जाएगा।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज :-


डीएम धीरज सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को 10 तारीख तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश वन विभाग जल संस्थान पीडब्ल्यूडी जिला पंचायत के अधिकारियों को दिए गए हैं। बताया कि समय से व्यवस्थाएं पूर्ण नहीं होने पर उच्च अधिकारियों की होने वाली बैठक के दौरान खामियां बरतने वाले अधिकारियों को नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। बताया बैठक के दौरान पैदल मार्ग से सूखे पेड़ काटने पथ प्रकाश की उचित व्यवस्था और छतीग्रस्त सड़क को दुरुस्त करने की बातें जनप्रतिनिधियों के द्वारा कही गई हैं ।जनप्रतिनिधियों को आश्वासन दिया गया है कि सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएंगी। बैठक में एडिशनल एसपी प्रदीप कुमार राय एसडीएम ऋषिकेश प्रेमलाल एसडीएम यमकेश्वर श्याम सिंह राणा एसडीएम नरेंद्र नगर युक्ता मिश्रा सीओ ऋषिकेश वीरेंद्र सिंह रावत सीओ नरेंद्र नगर प्रताप शाह नगर पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल सभासद नवीन राणा जितेंद्र धाकड़ एसएसआई मुनि की रेती संजीव कुमार दीपक रावत अनिल राणा आदि उपस्थित रहे।

बैठक में समाजसेवी क्रांति कपरुवान ने अधिकारियों के सामने मुद्दा रखा की वैष्णो देवी की तर्ज पर नीलकंठ मंदिर में भी श्राइन बोर्ड का गठन होना चाहिए। क्योंकि साल भर में करोड़ों रुपए का चढ़ावा मंदिर में आता है लेकिन मंदिर की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा में कोई खर्च नहीं किया जाता है।

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